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                                          मार्ग विकास

प्रदेश के विकास के लिए अवस्थापना सुविधाओं को उपलब्ध कराने में मार्ग व्यवस्था का विशेष महत्व है। मार्गो का विकास प्रदेश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास हेतु नितांत आवश्यक है। इस महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने में लोक निर्माण विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

प्रदेश में दिनांक 31.3.14 को विभाग द्वारा अनुरक्षित मार्गो की कुल लम्बाई 203458.606 कि0मी0 है। लो0नि0वि0 के अन्तर्गत विभिन्न श्रेणियों के मार्गो की लम्बाई का विवरण निम्नवत् हैंैः-
 

क्रम सं0 मार्ग का वर्गीकरण 31-3-2011 तक  31-3-2012 तक 31-3-2013 तक    31-3-2014तक
1 2 3 4 5 6
1 राष्‍ट्रीय मार्ग 6684.900 6684.900 7550.000 7550.000
2 राज्‍य मार्ग 7957.083 7957.083 7703.387 7486.325
3 प्रमुख जिला मार्ग 7548.633 7548.633 7548.761 7358.139
4 अन्‍य जिला मार्ग 33915.00 37373.000 39244.813 41933.955
5 ग्रामीण मार्ग 127668.793 134539.386 139046.962 139130.187
  योग 183774.409 194103.002 201093.923 203458.606

 

टिप्पणीः-     इसमें 3962.00 कि0मी0 राष्ट्रीय मार्ग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधीन है।

                                                   मार्ग विकास नीति

यातायात का वर्तमान परिदृश्य तथा भविष्य में मार्ग यातायात में अप्रत्याशित वृद्धि और सामाजिक व आर्थिक दृष्टिकोण से प्रदेश के विकास को प्रगति प्रदान करने हेतु वर्ष 1998 में लागू मार्ग विकास नीति का पुनरीक्षण करते हुए नई मार्ग विकास नीति प्रस्तावित है, जिसमें मार्ग यातायात के क्षेत्र में हुए तकनीकी विकास एवं प्रचलित नवीन विधियों को भी अपनाया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित मार्ग विकास नीति के मुख्य बिन्दु निम्नवत् है:-

1 महत्वपूर्ण निर्णय लेने हेतु कम्प्यूटर आधारित भौगोलिक सूचना प्रणाली तथा मार्ग अनुरक्षण प्रबन्धन प्रणाली का समावेश।
2 असेट प्रबन्धन प्रणाली का समावेश।
3 मार्गों का कोर नेटवर्क सहित राष्ट्रीय मार्ग, राज्य मार्ग, मुख्य जिला मार्ग, अन्य जिला मार्ग तथा ग्रामीण मार्ग में वर्गीकरण।
4 विभिन्न श्रेणी के मार्गों का ज्यामितीय एवं तकनीकी संरचना में इन्डियन रोड कांग्रेस के मानकों का समावेश।
5 विशिष्ट क्षेत्र जैसे क्वैरी अथवा बार्डर रोडस् हेतु विशेष मापदण्ड।
6 सड़क सुरक्षा एवं सड़क दुर्घटनाओं को कम करने पर विशेष बल।
7 पारदर्शिता के उद्देश्य से इलेक्ट्रानिक निविदा प्रणाली का उपयोग।
8 मार्ग निर्माण के विभिन्न गतिविधियों में निश्चित समय सीमा निर्धारण एवं कार्यान्वयन।
9 मार्गों के अनुरक्षण के उद्देश्य से विभिन्न विभागों के बीच में स्वामित्व निर्धारण हेतु नीति।
10 सेतुओं के निर्माण, अनुरक्षण एवं विस्तारीकरण नीति।
11 सूचना तकनीकी का अधिकाधिक उपयोग पर बल।
12 मार्ग निर्माण में निजी संस्थानों की सहभागिता की नीति।
13 गुणवत्ता नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर स्पष्ट नीति।

 

महत्‍वपूर्ण मार्ग विकास योजनाएं